मधुबनी में युवा पत्रकार अविनाश झा की हत्या, स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की रिपोर्टिंग में थे सक्रिय

स्थानीय नर्सिंग की लापरवाही के कारण कई महिलाओं की असमय मृत्यु हो चुकी थी. इसके बाद अविनाश झा ने इस मुद्दे को मिशन के तौर पर लिया और जितने भी फ़र्जी नर्सिंग होम बेनीपट्टी (मधुबनी) में चल रहे थे उसके ख़िलाफ़ RTI और रिपोर्टिंग करनी शुरू की. 6 महीने पहले यहां के जितने भी नर्सिंग होम संचालक थे उन्होंने बैठक करके अविनाश को मारने की साज़िश भी की थी.

(कन्हैया मिश्रा, संपादक BNN न्यूज़)

BNN न्यूज़ के संपादक कन्हैया मिश्रा ये बताते हुए रुआंसे हो जाते हैं. अविनाश झा, 22 वर्षीय युवा पत्रकार थे, वो BNN न्यूज़ से 2 सालों से जुड़ कर बतौर कैमरामैन काम कर रहे थे. अविनाश झा ने अपनी 2 साल की पत्रकारिता में स्वास्थ्य संबंधी स्थानीय व्यवस्था पर सक्रिय रिपोर्ट्स बनायीं थी. अविनाश की रिपोर्ट के बाद मधुबनी के सिविल सर्जन ने स्थानीय नर्सिंग होम पर कारवाई भी की थी. अगस्त के महीने में स्वास्थ्य टीम ने आठ नर्सिंग होम और निजी क्लिनिक की जांच की थी. इसमें मां भगवती सेवा सदन, मनोकामना हेल्थ केयर सेंटर, प्रिंस हेल्थ केयर, लाइफ़ हेल्थ केयर सेंटर, मां भगवती हॉस्पिटल, ज्योति मेमोरियल हॉस्पिटल और शिवम सेवा संस्थान की जांच की थी. इस पूरी जांच में स्वास्थ्य टीम को ज्योति मेमोरियल हॉस्पिटल कहीं नहीं मिला.

(अविनाश झा, साभर- फेसबुक/Avi Jha Avinash)

मधुबनी के सिविल सर्जन ने डेमोक्रेटिक चरखा को जानकारी देते हुए बताया

अविनाश झा ने लोक शिकायत निवारण केंद्र में एक परिवाद दायर की थी. जिसके आलोक में जांच की गयी थी और अगस्त महीने में 4 नर्सिंग होम को दोषी पाया गया था और 50-50 हज़ार जुर्माने लगाये गए थे.

(सिविल सर्जन, मधुबनी)

बेनीपट्टी में स्थानीय नर्सिंग होम की मनमानी नयी नहीं है. इस जांच के 6 महीने पहले भी PHC प्रभारी डॉ. एसएन झा ने फ़र्जी नर्सिंग होम को अल्टीमेटम दिया था लेकिन उसके बाद भी फ़र्जी नर्सिंग होम नाम बदल कर काम कर रहे थे.

कन्हैया मिश्रा द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार साल 2019 में अविनाश झा ने बेनीपट्टी के कटैया रोड में जयश्री हेल्थ केयर के नाम से अपना नर्सिंग होम खोला था, जिसमें वो बाहर से चिकित्सकों को बुलाकर इलाज कराता था. इसी बीच प्रतिद्वंदी नर्सिंग होम द्वारा हंगामा कराया गया जिससे आहत होकर अविनाश ने नर्सिंग होम के फ़र्जीवाड़े के ख़िलाफ़ लोक शिकायत निवारण केंद्र में शिकायतें और RTI करना शुरू कर दिया था.

अविनाश झा लगातार निजी नर्सिंग होम के ख़िलाफ़ लिख रहे थे और शिकायतें कर रहे थे. उन्होंने 7 नवंबर को अपने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा था, ‘द गेम विल रीस्टार्ट ऑन द डेट 15.11.2021’. अविनाश झा के चचेरे भाई और BNN न्यूज़ के संस्थापक बिशेश्वर नाथ उर्फ़ बीजे विकास बताते हैं

(फेसबुक स्टेटस पर अविनाश झा ने पोस्ट किया था. साभार- फेसबुक/ Vijay Kumar)

इस पोस्ट के बाद अविनाश झा 9 नवंबर को लापता हो गया, हमने इसकी शिकायत अगले दिन दी और 11 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज हो गई. सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक वो रात 9 बजे से 9.58 बजे तक घर की गली के आगे पड़ने वाली मुख्य सड़क पर फोन पर बात करते दिख रहा है. वो आख़िरी बार रात दस बजकर दस मिनट पर बाज़ार में दिखा

इसके बाद अविनाश झा की जानकारी किसी को नहीं मिली. अगले दिन दिन सुबह परिजनों ने अविनाश को खोजना शुरू किया. खोजबीन के दौरान लोगों ने पाया कि उसका क्लिनिक, जहां वह बैठ कर काम किया करता था, खुला हुआ है और उसी में उसकी बाइक की चाभी भी रखी हुई है और लैपटॉप भी ऑन है. इससे परिवार वालों ने अनुमान लगाया कि अविनाश बाहर से जल्द ही वापस लौटने वाला था लेकिन ऐसा हुआ नहीं.


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अविनाश के लापता होने की ख़बर सोशल मीडिया के ज़रिये स्थानीय लोगों में वायरल हो चुकी थी. बेनीपट्टी थाने में बड़े भाई चंद्रशेखर ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई लेकिन पुलिस को अविनाश की कोई भी जानकारी नहीं मिली. पुलिस ने अविनाश के मोबाइल को ट्रेस किया तो लोकेशन बेनीपट्टी थाने से पांच किलोमीटर दूर बेतौना गांव में मिली. 10 नवंबर की सुबह 9 बजे के बाद उनका फ़ोन भी बंद हो गया. स्थानीय पुलिस ने उनकी अंतिम लोकेशन पर जाकर जानकारी ली लेकिन कुछ ठोस नहीं मिला. 12 नवंबर को बुद्धिनाथ के चचेरे भाई बीजे विकास के फोन पर पड़ोस के उड़ेन नाम के गांव से एक स्थानीय व्यक्ति ने फ़ोन किया और एक अज्ञात लाश के मिलने की जानकारी दी. लाश अधजली हालत में थी. अविनाश की पहचान उसके हाथ की अंगूठी और चेन से की गयी.

(अविनाश झा के बड़े भाई चंद्रशेखर द्वारा दर्ज कराई गयी FIR)

अविनाश अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे. अविनाश के परिवार वालों ने इस हत्या के पीछे स्थानीय नर्सिंग होम को ज़िम्मेदार बताया है. हालांकि पुलिस ने इस बात से इंकार किया है. हत्या की पुष्टि करते हुए बेनीपट्टी थाने के एसएचओ कहा,

सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है. इस मामले में लगातार छापेमारी जारी है और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है

हालांकि कन्हैया मिश्रा ने इस बात का खंडन करते हुए डेमोक्रेटिक चरखा को बताया

एसपी का कहना है कि इसमें एक महिला और एक पुरुष की गिरफ़्तारी की गयी है लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसा कोई भी सूचना हमें नहीं मिली है.

(अविनाश झा का फेसबुक पोस्ट)

जानकारी के अनुसार चन्द्रशेखर कुमार झा ने अलजीना हेल्थ केयर बेनीपट्टी, शिवा पॉली क्लीनिक मकिया, सुदामा हेल्थ केयर धकजरी, सोनाली हॉस्पिटल बेनीपट्टी, मां जानकी सेवा सदन अम्बेडकर चौक बेनीपट्टी, आराधना हेल्थ एंड डेंटल केयर क्लीनिक बेनीपट्टी, जय मां काली सेवा सदन बेनीपट्टी, अंशु कष्ट एंड सेंटर धकजरी, सानवी हॉस्पिटल नंदीभौजी चौक, अन्नया नर्सिंग होम बेनीपट्टी, अनुराग हेल्य केयर सेंटर बेनीपट्टी, आरएस मेमोरियल अस्पताल बेनीपट्टी सहित कुछ अज्ञात लोगों पर आशंका व्यक्त करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है. अविनाश झा का अंतिम संस्कार सिमरिया में किया गया.

कई बड़े मीडिया संस्थान ने अविनाश झा की हत्या को प्रेम प्रसंग में हुई हत्या बताया है. इस ख़बर का खंडन करते हुए बीजे विकास कहते हैं

जो पत्रकार प्रेम प्रसंग में हत्या की खबर बना रहे हैं, उनके लिए सिर्फ एक लाइन कहूंगा, अगर प्रेम प्रसंग में हत्या साबित हुई तो मैं पत्रकारिता छोड़ दूंगा और अगर प्रेम प्रसंग में हत्या नहीं साबित हुआ तो तुम तो पत्रकारिता नहीं ही छोड़ोगे, लेकिन गाल पर तमाचा देर सबेर जब महसूस हो जाये, तब कम से कम चाटुकारिता छोड़ देना।

(इस मुद्दे पर बीजे विकास ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर एक पोस्ट भी लिखा है.)

पत्रकारों और RTI एक्टिविस्ट की हत्या बिहार में लगातार होते रही है. तकरीबन एक महीने पहले पूर्वी चंपारण में विपिन अग्रवाल, जो एक RTI एक्टिविस्ट थे, उनकी हत्या कर दी गई थी. अगस्त के महीने में अरेराज में मनीष कुमार सिंह नाम के एक पत्रकार की हत्या कर दी गयी थी. मनीष कुमार की लाश उनके 3 दिन लापता रहने के बाद मिली थी. मनीष कुमार की बर्बर हत्या कर उनकी आंखें निकाल दी गयी थी.

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