आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में बेरोजगारी की क्या है स्थिति?

बिहार में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है. 12 फरवरी 2024 को विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार राज्य में बेरोजगारी की स्थिति देश के औसत से अधिक है.

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बिहार में बेरोजगारी

बिहार में बेरोजगारी

चुनावी महिना सर पर मंडरा रहा है, चुनाव के बहुत पहले से ही बिहार की राजनीतिक पार्टियों ने युवाओं के बीच लाखों नियुक्तियां जारी करने की शुरुआत कर दी थी. लेकिन क्या इन सबसे राज्य में रोजगार की स्थिति बदल सकती है. 

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12 फरवरी 2024 को विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार राज्य में बेरोजगारी की स्थिति देश के औसत से अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बेरोजगारी दर 4.3% है, जो राष्ट्रीय औसत 3.4% से 0.9% से अधिक है. हालांकि केरल (8.4%), हरियाणा(6.4%) और पंजाब (6.7%) जैसे राज्यों के मुकाबले बिहार की स्थिति काफी बेहतर है.

रिपोर्ट के अनुसार सालभर में मनरेगा के तहत रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या 48 लाख से बढ़कर 50 लाख हुई है. वहीं मनरेगा में सालाना रोजगार सृजन दिवस में बढ़ोतरी हुई है. रोजगार सृजन की अवधि 18 करोड़ 11 लाख मानव दिवस से बढ़कर अब 23 करोड़ 65 लाख मानव दिवस हो गई है. 

वहीं बात अगर राज्य के औसत आय की तो राज्य में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2022-23 में स्थिर (आधार वर्ष 2011-12) मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 9% की वृद्धि के साथ 35,119 रूपए बताई गयी है. जो राष्ट्रीय औसत 1,72,000 रूपए से काफी कम है.

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर पिछले वर्ष की तुलना में 13.9% की वृद्धि होती है तो आने वाले दिनों में लोगों की औसत आय में वृद्धि हो सकती है. अनुमानित वृद्धि दर के हिसाब से लोगों की औसत आय बढ़कर 59,637 रुपए होने का अनुमान लगाया गया है.

सावधिक श्रम शक्ति सर्वेक्षण 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण बिहार की 68.8% आबादी आर्थिक रूप से सक्रिय कमाऊ आबादी पर निर्भर थी. वहीं शहरी बिहार में 49.3% आबादी आर्थिक तौर पर दूसरों पर निर्भर है.

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