“डेमोक्रेटिक चरखा का काम बिहार में उन समुदायों की आवाज़ बनाना है जिनका प्रतिनिधित्व आज तक मीडिया में नहीं रहा है. अभी तक हमलोगों ने 50 हज़ार से अधिक लोगों के जीवन में सीधा बदलाव लाया है. जब मीडिया ने अपना काम करना लगभग बंद कर दिया तब बिहार के युवाओं ने मिलकर डेमोक्रेटिक चरखा की नींव 15 मार्च 2020 को रखी.”

“Democratic Charkha aims to serve as a voice for those communities which never any had representation in media yet. So far we have made a direct impact in the lives of over 50 thousand people. When popular media had ceased to do their job, youth of Bihar laid foundation to Democratic Charkha on March 15, 2020.”

आमिर अब्बास/ Amir Abbas

फाउंडर, सीईओ और हेड एडिटर / Founder, CEO and Head Editor

आमिर अब्बास पिछले 7 सालों से ग्रामीण और सामुदायिक पत्रकारिता में सक्रिय हैं. साल 2015 में अपने परिवार की आर्थिक स्थिति ख़राब होने की वजह से 18 साल की उम्र में आमिर ने अपनी सामुदायिक पत्रकारिता की शुरुआत वीडियो वालंटियर्स के साथ की. साथ में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी जारी रखी. साल 2018 में इतिहास से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद आमिर ने दिल्ली में Youth Ki Awaaz (हिन्दी) के लिए सोशल मीडिया एडिटर के तौर पर काम किया. साल 2019 आमिर ने वीडियो वालंटियर्स के लिए असिस्टेंट स्टेट कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभायी. आमिर ने 2019-21 में पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर्स की पढ़ाई पटना यूनिवर्सिटी से की.

Amir Abbas has been active in rural and community journalism since past 7 years. He started community journalism in the year 2015 at the age of 18 due to poor economic conditions of his family. He first worked with Video Volunteers, and alongside continued his studies. In the year 2018 after finishing his graduation in History, Amir went on to work as a social media editor for Youth Ki Awaaz (Hindi) in Delhi. In the year 2019 Amir worked with Video Volunteers as an Assistant State Co-ordinator. During 2019-21, he did his Master’s in Journalism and Mass Media from Patna University.

खालिद जमशेद/ Khalid Jamshed

को फाउंडर और चीफ़ ऑफ़ फाइनेंस/ Co-founder and Chief of Finance

ख़ालिद जमशेद ने डेमोक्रेटिक चरखा को आईडिया स्टेज से निकाल कर उसे सच करने का काम किया. ख़ालिद ने अपनी पढ़ाई पत्रकारिता और जनसंचार से की है. डेमोक्रेटिक चरखा के लिए ख़ालिद का काम रेवेन्यू इकठ्ठा करना साथ ही सही ढंग से खर्च करना है. ख़ालिद की वजह से डेमोक्रेटिक चरखा बदलाव की पत्रकारिता कर पाने में सक्षम है.

Khalid Jamshed took Democratic Charkha from ‘idea stage’ and made it a reality. Khalid did his studies in journalism and mass media commication. At Democratic Charkha his job is to raise revenue and manage spending. It is because of Khalid that Democratic Charkha is able to deliver a journalism of change.

मोहम्मद वहीद आज़म/ Mohammad Waheed Azam

को फाउंडर और चीफ़ ऑफ़ ऑपरेशन/ Co-founder and Chief of Operations

मोहम्मद वहीद आज़म ने साल 2020 में अपना ग्रेजुएशन पटना कॉलेज से पूरा किया और पहले दिन से ही डेमोक्रेटिक चरखा का सबसे बड़ा सपोर्ट बनकर खड़े रहें. कंटेंट को शूट करना, लिखना और उसे तय समय पर पब्लिश करना वहीद की ज़िम्मेदारी है. स्टोरी की तलाश करना और पत्रकारों से उसपर रिपोर्ट करवाना वहीद का ही काम है

Mohammad Waheed Azam finished his graduation from Patna College in the year 2020, and has been a biggest supporter of Democratic Charkha since its inception. From content-shooting, writing and publishing on time, it’s Waheed’s responsiblity. Along with it looking for stories and making journalists report on them is Waheed’s job. He is a think-tank to Democratic Charkha.

अनुप्रिया सिंह/ Anupriya Singh

हेड ऑफ़ रिपोर्टर्स और एडिशनल डायरेक्टर/ Head of Reporters and Additional Director

डेमोक्रेटिक चरखा सिर्फ़ बदलाव की बात नहीं करता बल्कि अपने टीम में भी बदलाव दिखाता है. अनुप्रिया भी उसी बदलाव का एक हिस्सा हैं. हिन्दी मीडिया में आजतक कभी भी किसी ट्रांसजेंडर महिला को मुख्य एंकर के तौर पर जगह नहीं दी गयी. इसी परिपाटी को तोड़ते हुए डेमोक्रेटिक चरखा ने साल 2020 में अनुप्रिया के साथ काम करना शुरू किया. मीडिया का कोई अनुभव नहीं होने के बाद भी डेमोक्रेटिक चरखा की ट्रेनिंग के बाद अनुप्रिया हिन्दी मीडिया की पहली मुख्य एंकर बनी. अपने पहले रिपोर्ट से ही अनुप्रिया ने बदलाव की शुरुआत की. अनुप्रिया की रिपोर्ट के बाद बिहार में कोरोना के दौरान ट्रांसजेंडर को राशन बांटा गया, ट्रांसजेंडर को सरकारी नौकरियों में 1% का आरक्षण और राशन कार्ड भी बना कर दिया गया. साल 2022 में अनुप्रिया को डेमोक्रेटिक चरखा के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर में जगह देते हुए एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया.

Democratic Charkha does not only speak of changes but shows it in its team as well. Anupriya is also a part of that change. So far Hindi media never gave a transgender woman a place as a chief anchor. Breaking this prejudice, Democratic Charkha started working with Anupriya in the year 2020. Despite not having any experience with media, Anupriya became the first chief anchor in Hindi media after her training with Democratic Charkha. She started bringing about changes right from her first report. It was after her reporting that in Bihar during the Covid-19 pandemic rations were distributed among the transgender community, and they were provided 1 percent reservations in government jobs and were also given their ration cards. In 2022, Anupriya was given a seat at Board of Directors in Democratic charkha and was made the Additional Director.

स्वाति साह/ Swati Shah

सीनियर वीडियो एडिटर/ Video Editor

स्वाति साह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. पटना विमेंस कॉलेज से जन संचार विभाग में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान दैनिक जागरण में इंटर्न रिपोर्टर के तौर पर काम किया. साल 2020 में पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वाति ने पटना में Gender Alliance के लिए प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया. काम के साथ-साथ स्वाति पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर्स की पढ़ाई भी कर रही हैं.

Swati Shah has been active as a journalist since last 2 years. She finished her graduation in Mass Communication at Patna Women’s College, and worked as an intern reporter at Dainik Jagran alongside. After completing her studies Swati worked as a programme coordinator and Video Editor for Gender Alliance (NGO). Now she is pursuing her Master’s in Mass Communication from NOU beside her job as a journalist.

Independent and Public-Spirited Media Foundation has engaged Democratic Charkha for the purpose of reporting and publishing stories of public interest. IPSMF does not take any legal or moral responsibility whatsoever for the content published by  Democratic Charkha  on their website on any of its other platforms.”