विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR): चुनाव आयोग का दूसरा नाम ढाक के तीन पात

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की फाइनल सूची जारी हो चुकी है. लेकिन क्या इतना हो-हल्ला होने के बाद भी सूची में सुधार हुआ है?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की फाइनल सूची जारी हो चुकी है. लेकिन क्या इतना हो-हल्ला होने के बाद भी सूची में सुधार हुआ है?

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद एक सियासी हंगामा शुरू हुआ. विपक्ष ने इसके इर्द-गिर्द वोट चोरी का कैंपेन बनाया और पक्ष ने इसे पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के लिए ज़रूरी बताया. हालांकि ग्राउंड ज़ीरो पर SIR का मामला अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम को भगाने की कवायद ही समझा गया.

इसके राजनैतिक पक्ष के अलावा सामाजिक पक्ष को समझने के लिए हमारी टीम ने बीते दो महीनों में SIR से संबंधित कई स्टोरी की. सभी स्टोरी में एक बात साफ़ थी, निर्वाचन आयोग ने अपना काम ठीक से नहीं किया है.

30 सितंबर को जब SIR फ़ाइनल रोल जारी किया गया, तब उम्मीद थी कि शायद निर्वाचन आयोग ने अपनी गलतियों को सुधारा होगा. लेकिन हुआ उसके उलट- ढाक के तीन पात. कुछ बदलाव और आपत्तियों को ठीक करने के बाद सूची जस के तस प्रकाशित कर दी गयी.

इस आर्टिकल में 2 दिन में किये गए विश्लेषण के बारे में बात करेंगे.

PDF की जगह तस्वीर अपलोड, क्या छुपा रहा है चुनाव आयोग?

SIR ड्राफ्ट रोल की सूची जब जारी की गयी थी, उस समय इसे PDF फॉर्मेट में प्रकाशित किया गया था. यानी आप उस PDF को डाउनलोड करके अपने कंप्यूटर या मोबाइल से एपिक नंबर सर्च कर सकते थें. उसके बाद 7 अगस्त को राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वोट चोरी का आरोप लगाया गया. इसके बाद निर्वाचन आयोग ने PDF फॉर्मेट को हटा कर सूची की तस्वीर अपलोड कर दी.

SIR फाइनल सूची में PDF की जगह तस्वीर अपलोड की गयी
(SIR फाइनल सूची में PDF की जगह तस्वीर अपलोड की गयी)

इससे नुकसान?

अब आप इसमें सर्च नहीं कर सकते हैं. फाइनल ड्राफ्ट में भी यही किया गया है. यानी अब सूची में प्रकाशित एक-एक नाम की जांच करके गड़बड़ी बतानी पड़ेगी जो मुमकिन नहीं है. अगर इसे PDF फॉर्मेट में जारी किया जाता तो कई AI टूल्स जैसे- Chat GPT, Perplexity.ai के साथ इसकी जांच कर व्यापक स्तर में गड़बड़ी पकड़ी जा सकती थी.

तस्वीर अपलोड करने की वजह से ये गड़बड़ी पकड़ने में काफ़ी समय लगेगा.

मकान संख्या अभी भी गलत, डुप्लीकेसी भी मौजूद- फिर काहे का गहन पुनरीक्षण

जब SIR ड्राफ्ट रोल जारी हुआ था, उस समय हमारी टीम ने 188- फुलवारी विधानसभा का विश्लेषण किया था. उसमें सूची में मकान संख्या में काफ़ी गड़बड़ी थी. कई मकान संख्या में 0, NA और ना लिखा हुआ था. ऐसे में मतदाताओं को वेरीफाई करना नामुमकिन है. ये मतदाता बिहार के हैं या बिहार से बाहर के, ये नहीं पता लगाया जा सकता है.

SIR का उद्देश्य सरकार ने मकान संख्या सहित निर्वाचक की बाकी जानकारियों को सटीक बनाने के लिए किया था. लेकिन इतनी माथापच्ची के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है.

उदाहरण के तौर पर 188-फुलवारी विधानसभा के बूथ नंबर 65 में 780 निर्वाचक संख्या में मकान संख्या ‘हाउस’ लिखा हुआ है. वैसे ही निर्वाचक संख्या 764 में मकान संख्या ‘एन/ए’ लिखा हुआ है. निर्वाचक संख्या 765, 766, 767 में मकान संख्या ‘नं’ लिख हुआ है.

गलत मकान संख्या अभी भी मौजूद
(गलत मकान संख्या अभी भी मौजूद)

अगर बात करें डुप्लीकेसी की तो इसी बूथ में निर्वाचक संख्या 806 और 807 एक ही नाम, एक ही मकान संख्या और ही उम्र होने के बाद भी दो एपिक नंबर है.

SIR फाइनल सूची में अभी भी डुप्लीकेसी
(SIR फाइनल सूची में अभी भी डुप्लीकेसी)

मृतकों के नाम अभी भी सूची में शामिल

SIR ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद हमारी टीम ने मृतकों के नाम की सूची बनायी थी, जिनके नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल हैं. जिसकी शिकायत PUCL ने निर्वाचन आयोग से भी की थी. लेकिन शायद निर्वाचन आयोग ने उस लिस्ट को सीरियसली नहीं लिया. शायद इसी वजह से मृतकों की सूची, जो निर्वाचन आयोग को सौंपी गयी थी, वो अभी भी फाइनल रोल में मौजूद है.

SIR फाइनल सूची में मृतकों के नाम अभी भी मौजूद
(SIR फाइनल सूची में मृतकों के नाम अभी भी मौजूद)

क्या इनके वोट का इस्तेमाल भी किया जाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है. जब निर्वाचन आयोग के पास इन मृतकों की सूची भी पहुंचाई गयी, तब भी उन्होंने इस पर कोई कार्यवाई क्यों नहीं की? क्या इसका मकसद उनके वोट का इस्तेमाल आगामी चुनाव में करना है? क्या इससे चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष बन पायेगा?