भीषण गर्मी और 4-5 घंटे की दैनिक बिजली कटौती से परेशान हैं पटनावासी

सोमवार 10 जून के दोपहर 3 बजे राजधानी पटना में बिजली की खपत 810 मेगावाट पहुंच गई. इससे पहले 30 मई को सबसे अधिक 863 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी. बीते वर्ष 17 जून को रिकॉर्ड 775 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी.

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पल्लवी कुमारी
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बिजली से परेशान पटना के लोग

बिजली कटौती से परेशान पटना वासी

अगर पहाड़ी राज्यों को छोड़ दें तो इस समय पूरा देश भीषण गर्मी (Scorching heat) की चपेट में हैं. लगभग सभी राज्यों में पारा 40 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है. अगर बिहार की राजधानी पटना (Scorching heat in Bihar) की बात की जाए तो यहां की जनता गर्मी से बेहाल है. पटना में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया है जो कि सामान्य से 6.7 डिग्री अधिक है. दोपहर के समय यही तापमान 46 डिग्री जैसा महसूस होने लग रहा है. 

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मौसम विभाग का कहना है कि 14 जून तक पटना समेत राज्य के अधिकांश जिलों में लू चलेंगी. क्योंकि राज्य में मानसून की दस्तक 15 जून के बाद ही होगी. 

इस दौरान लोग गर्मी से बचने के लिए लगातार एसी, कूलर, पंखा, फ्रिज आदि चला रहे हैं. लेकिन बीते एक हफ्ते से राजधानी पटना के वासियों को इससे भी राहत नहीं मिल पा रही हैं. कारण है- “बिजली कटौती और लोडशेडिंग.”

कभी नाला उड़ाही तो कभी मेट्रो निर्माण के कार्य के कारण बिजली घंटो तक काटी (Power cuts) जा रही है. जिसके कारण कृत्रिम साधनों से भी लोगों को ठंडक नहीं मिल पा रही है. बिजली विभाग के अनुसार लोग लगातार एसी, कूलर, पंखा, आदि चला रहे हैं जिसके कारण शहर में बिजली की खपत बढ़ गई है.

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बिजली कर्मियों का कहना है कि पहले पीक लोड शाम छह से 11 बजे के बीच ज्यादा होता था लेकिन गर्मी बढ़ने से यह दिन और रात में एक समान रहने लगा है. सोमवार 10 जून को दोपहर तीन बजे तक ही लगभग 810 मेगावाट बिजली की खपत हो गई थी.

बिजली कटौती से परेशान हैं आमलोग

राजधानी पटना ( Patna) के लोग बिजली ट्रिपिंग की समस्या का सामना कर रहे हैं. भीषण गर्मीं में बिजली कटने से लोगों को काफ़ी परेशानी उठानी पड़ रही है. शहर के 100 से अधिक डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हो चुके हैं. लोड बढ़ते ही फ्यूज उड़ने की समस्या आम हो गई है. वहीं शाम ढलते ही ट्रिपिंग होने लगती है.

बिजली कटौती की ज्यादा समस्या कंकड़बाग के पीसी कॉलोनी, खेमनिचक कदमकुआं, राजेंद्रनगर, पटना सिटी, गुलजारबाग, महेंद्रू, बोरिंग रोड, दीघा, कुर्जी, बेउर मीठापुर, राजाबाजार, रामलखनपथ, दानापुर और खगौल के इलाके में हो रही है.

बिजली कटौती का असर आम दिनचर्या के साथ-साथ छात्र और वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ रहा है.

बोरिंग रोड में रहने वाली कोमल  वीडियो एडिटर हैं. कोमल  का काम वर्क फ्रॉम होम होता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से बिजली कटौती की समस्या के कारण कोमल  अपना काम समय पर पूरा नहीं कर पा रहीं हैं. ट्रिपिंग और बिजली कटौती से परेशान कोमल  कहती हैं “मेरा काम वीडियो एडिटिंग का है. इसके लिए मुझे मेरा लैपटॉप हमेशा चार्ज रखना होता है. मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा है जिसकी वजह से मुझे लाइट पर डिपेंडेंट होना पड़ता है. काम को पूरा करने के लिए मुझे इंटरनेट की भी आवश्यकता होती है. लेकिन 4 से 5 घंटे तक लाइट कटने की वजह से मेरा काम रुक जाता है."

वर्क फ्रॉम होम

कोमल  का कहना है कि आगे भी इसी तरह अगर वह काम समय पर पूरा नहीं कर सकी तो हो सकता है उनकी सैलरी भी कट जाए. कोमल की तरह ही गोविंद मित्रा रोड में रहने वाली सौम्या बिजली कटौती से परेशान हैं. सौम्या का कहना है कि “लाइट पर ही तो गर्मी में लोग टिका हुआ है. लाइट नहीं है तो लोग बाहर भाग जाते हैं. लेकिन बाहर भी इतनी धूप है तो लोग घूमकर घर आ जाते हैं. लाइट कटने पर इनवर्टर भी कितना चलाया जा सकता है, क्योंकि इनवर्टर भी तो लाइट पर ही टिका है. लाइट नहीं रहती है तो इनवर्टर भी चार्ज नहीं होता है.”

ट्रिपिंग और लाइट कटने की शिकायत करने के बावजूद लाइट कटने की समस्या दूर नहीं हो रही है. पिछले एक सप्ताह में फ्यूज कॉल सेंटरों पर ट्रिपिंग और लाइट कटने की शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी हो गयी है.

दरअसल गर्मी बढ़ने के साथ ही एसी, कूलर और पंखा चलाने के घंटे बढ़ गये हैं. गर्मी से बचने के लिए लोग लगातार एसी, कूलर और पंखा चला रहे हैं. एक मकान में जहां औसतन 5 से 6 घंटे एसी चलता था, वहां अब दिन के 12 से 15 घंटे एसी चलाया जा रहा है. इसके चलते पिछले एक सप्ताह में बिजली की खपत काफी बढ़ गयी है.

सोमवार 10 जून के दोपहर 3 बजे राजधानी पटना में बिजली की खपत 810 मेगावाट पहुंच गई. इससे पहले 30 मई को सबसे अधिक 863 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी. हर साल बढ़ती गर्मीं के साथ बिजली खपत की दर भी बढ़ती जा रही है. बीते वर्ष 17 जून 2023 को रिकॉर्ड 775 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी. वहीं 13 जून 2022 में सबसे अधिक 735 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी. 

ओवरलोड हो रहे ट्रांस्फार्मर

गर्मी बढ़ते ही बिजली  कटौती की समस्या उत्पन्न हो जाती है. कारण बताया जाता है कि लोड बढ़ने से ट्रांसफार्मर लोड नहीं ले रहा है. जबकि यह समस्या हा साल की है. पिछले वर्ष भी ट्रिपिंग और फ्लक्चुएशन की शिकायत बढ़ने के बाद बिजली मुख्यालय के अधिकारियों ने ओवरलोडेड ट्रांसफॉर्मरों के बगल में अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाने का निर्देश दिया था.

ओवरलोड ट्रांसफार्मर

पिछले पांच वर्षों में राजधानी पटना में एक लाख उपभोक्ता बढ़े हैं, जिसके कारण 250 मेगावाट बिजली की खपत बढ़ी है. स्थानीय स्तर पर लोड का सही आकलन नहीं होने के कारण डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पर अचानक लोड बढ़ जा रहा है. इससे फेज उड़ना, फ्लक्चुएशन और ट्रिपिंग जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है. इसको रोकने के लिए अबतक डाटा एनालिसिस नहीं किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉमर्स से बिजली खपत के आकलन के लिए मीटर लगाया जा रहा है. उसके बाद एनर्जी अकाउंटिंग शुरू होगी. तब सही से खपत का आकलन हो सकेगा. अभी मीटर नहीं होने के कारण लोड का आकलन मैनुअल तरीके से घर के आधार किया जा रहा है. यह आकलन तकनीकी रूप से सही नहीं है.

बीते चार माह में पेसू क्षेत्र में 325 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. इस चालू सीजन में 88 मेगावाट बिजली की खपत बढ़ी है.

क्या है एनर्जी अकाउंटिंग डिस्ट्रीब्यूशन

ट्रांसफार्मर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर  (Smart Meter) लगने से कंट्रोल रूम को ट्रांसफार्मर के हिसाब से उस क्षेत्र में खपत होने वाली बिजली की जानकारी मिलेगी. उसके आंकड़ों को देखकर फीडर के लोड का सही आकलन किया जा सकेगा. साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर और केबल या ओपन तार की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी ताकि लोड बढ़ने पर  फेज उड़ने जैसी समस्या ना हो.

बिजली बोर्ड

पटना में 7 लाख बिजली उपभोक्ता है. यहां पावर सबस्टेशन की संख्या 75 जबकि पावर ट्रांसफार्मर की संख्या 201 है. वहीं डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर की संख्या 6,767 है.इसके अलावे प्रत्येक अपार्टमेंट का अपना डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर है. 33 केवी फीडर की संख्या 88 और 11 केवी फीडर की संख्या 312 है.

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