ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी होने के बाद पक्ष और विपक्ष के बीच इस सूची को गलत या सच साबित करने के लिए ट्वीट और बयानों का सिलसिला शुरू हो गया है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर कहा है- यह सूचकांक भारत की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है, इसमें कई खामियां हैं. इसकी गणना के लिए उपयोग किए गए चार संकेतकों में से तीन संकेतक वास्तव में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं. ऐसे में यह पूरी आबादी के बारे में नहीं बता सकता.
भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है- यह देश की छवि खराब करने की कोशिश है. भुखमरी पर इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के बच्चों में कमजोरी की दर 18.7 फीसदी है. जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. यह दर दर्शाती है कि देश में कुपोषण बहुत अधिक है.
दुनिया के 125 देशों में भारत 111वें स्थान पर
वहीं, देश में अल्पपोषण यानी आधे पोषण की दर 16.6% है. देश में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 3.5% है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 से 24 साल की महिलाओं में एनीमिया की दर 58.1% है.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2023 जारी होने के बाद बिहार के लालू प्रसाद यादव ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि दुनिया के 125 देशों में भारत 111वें स्थान पर है. भारत का स्कोर 28.7% है जो इसे उस श्रेणी में रखता है. जहां भूख और भुखमरी की स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक है.
2013 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 63वें स्थान पर था। भाजपा सरकार की गरीब विरोधी नीतियों के कारण 10 वर्षों में भारत हंगर इंडेक्स में 63वें स्थान से फिसलकर 111वें स्थान पर आ गया है.
अब केंद्र की मोदी सरकार रिपोर्ट को समझने और स्वीकार करने और अपनी नीतियों में सुधार करने के बजाय आदतन रिपोर्ट और इंडेक्स को झूठ और त्रुटियों से भरा बताएगी.





