1993 बम ब्लास्ट का आरोपी अब्दुल करीम टुंडा बरी, जानें पूरी कहानी

30 साल के बाद गुरुवार को अजमेर की टाडा अदालत ने 1993 के एक केस पर अपना फ़ैसला सुनाया. अदालत ने राजधानी बम ब्लास्ट के मामले में आरोपी आतंकी टुंडा को रिहाई दी है.

साल 1993 में देश के 5 और 6 दिसंबर को देर रात लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, सूरत और मुंबई में राजधानी एक्सप्रेस सहित लंबी दूरी की छह ट्रेनों पर धमाके हुए थे. इन धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 22 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

इस घटना के 30 साल के बाद गुरुवार को अजमेर की टाडा अदालत ने मामले में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को बरी किया है. टाडा अदालत के न्यायाधीश महावीर प्रसाद गुप्ता ने इन सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और अब्दुल करीम कुंडा को बरी कर दिया. सीबीआई ने अब्दुल करीम टुंडा के जमानत पर सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देने की बात कही है. एजेंसी ने कहा है कि मामले में अब तक 12 लोगों को दोषी ठहराया गया है, जिनमें इरफान और हमीर उल-उद्दीन शामिल है.

टाडा कोर्ट के इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है.

देश में दहशत फैलाने के लिए और अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी पर 5 और 6 दिसम्बर को बम ब्लास्ट किया गया था. इस घटना में उत्तर प्रदेश निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा, हमीदुद्दीन उर्फ हमीद और इरफान के खिलाफ गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में चार आरोपियों को पहले राहत दी थी. इस पूरे मामले में दो आरोपी निसार अहमद और मोहम्मद तुफैल पुलिस की पहुंच से फरार है.