13 साल का इंतज़ार: उर्दू-बांग्ला TET अभ्यर्थियों के सपनों पर भारी सिस्टम की बेरुख़ी

बिहार में सरकारी नौकरियों का अपना एक रुतबा है. इसकी तैयारी में छात्र वर्षों तक लगे रहते हैं. लेकिन ज़रा सोचिए कि आप एक सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दें, उसका रिज़ल्ट जारी हो, फिर वह रिज़ल्ट रद्द कर दिया जाए, उसके बाद नया रिज़ल्ट आए और यह सिलसिला बार-बार चलता रहे. इसी इंतज़ार में अगर आपके जीवन के 15 साल निकल जाएं, तो आप पर क्या बीतेगी?

ठीक यही हाल है बिहार में उर्दू-बांग्ला TET की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों का, जो पिछले 15 साल से अपने रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

साल 2013 में 27,000 उर्दू शिक्षकों की बहाली के लिए बिहार सरकार ने उर्दू TET परीक्षा आयोजित की थी. परीक्षा के बाद यह सामने आया कि लगभग 28 प्रश्न गलत थे. इन गलत प्रश्नों को लेकर पूरे बिहार में धरना-प्रदर्शन हुआ. उस समय बिहार के कई बड़े नेता भी इस आंदोलन में शामिल हुए. इसके बाद मुख्यमंत्री ने एक उच्च स्तरीय समिति बनाई, जो 11 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति थी.

समिति ने माना कि सवाल गलत थे और उम्मीदवारों को उनके बदले अंक दिए जाने चाहिए. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. सरकार ने केवल रिज़ल्ट को संशोधित किया और जारी कर दिया, जिसमें लगभग 26,500 लोग पास घोषित हुए. सभी उम्मीदवारों का नाम मेरिट लिस्ट में शामिल कर लिया गया. लेकिन इसी के साथ शुरू हुआ 13 सालों का लंबा इंतज़ार.

क्या हुआ इन 13 सालों में?

इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए जब हमने बिहार उर्दू-बांग्ला TET संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुफ़्ती हसन रज़ा से बात की, तो उन्होंने बताया कि 2015 में जब सारे मामले ठीक हो गए और रिज़ल्ट जारी हो गया, उसके बाद बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई.

लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगा जब बहाली से ठीक एक हफ़्ता पहले तत्कालीन BSEB अध्यक्ष आनंद किशोर ने रिज़ल्ट में ‘तकनीकी खराबी’ की बात कही और रिज़ल्ट को रद्द कर दिया गया. इसके बाद नया रिज़ल्ट जारी हुआ, जिसमें 26,500 अभ्यर्थियों में से लगभग 12,000 उम्मीदवारों को फेल कर दिया गया.

इसके बाद विरोध और प्रदर्शनों का लंबा सिलसिला शुरू हुआ. साल 2018 में मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री और कई अधिकारी मौजूद थे. बैठक में तय हुआ कि कोर्ट से लीगल ओपिनियन लिया जाएगा.

कोर्ट का निर्णय अभ्यर्थियों के पक्ष में आया और 2019 में यह तय हुआ कि कट-ऑफ़ 5% घटाकर रिज़ल्ट जारी होगा. लेकिन आज तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ.

उम्मीदवारों का बिगड़ता जीवन

जो अभ्यर्थी पिछले 10–12 साल से रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं, उनकी उम्र निकल चुकी है. रोजगार के अभाव में कई लोगों ने छोटे-मोटे पान-चाय की दुकान खोल ली, कुछ मजदूरी करने दूसरे राज्यों में चले गए, और कई लोग विदेश जाकर छोटी नौकरियां करने को मजबूर हो गए.

सबसे बुरा असर महिलाओं पर पड़ा. रिज़ल्ट आने के बाद जिनकी शादियों के रिश्ते तय हुए थे, उनमें से अधिकतर रिश्ते टूट गए. कई महिलाएं मानसिक तनाव का शिकार हो गईं.

“पढ़ाई से अच्छा कोई और काम कर लेते”

सोहेल नाम के एक अभ्यर्थी ने हमें बताया, “2013 में हमने एग्ज़ाम दिया था. उस समय लगा था कि नौकरी लग जाएगी और सारी समस्याएं हल हो जाएंगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. लगातार रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं. न जाने कितनी बार धरना-प्रदर्शन किया, कितनी बार लाठीचार्ज खाए, विधानसभा में मुद्दा उठा, मुख्यमंत्री से मिले, लेकिन आज तक हमारे हाथ में नियुक्ति पत्र नहीं आया. अगर 10 साल किसी काम में लगाए होते तो कम से कम परिवार का पालन-पोषण कर लेते. मेरे कुछ साथी जिन्होंने यह परीक्षा दी थी, उनमें से कुछ ने तो आत्महत्या तक कर ली है.”

क्या सिर्फ मुस्लिम अभ्यर्थियों की वजह से हो रही है देरी?

मुफ़्ती हसन रज़ा ने कहा, “एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रोजगार और विकास की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पिछले 13 साल से हम सिर्फ़ एक रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं. मुझे लगता है कि शायद इसकी वजह यह भी हो सकती है कि इस परीक्षा के ज़्यादातर अभ्यर्थी मुस्लिम समाज से हैं. वरना आपने कहाँ देखा है कि लोग एग्ज़ाम देने के बाद 13 साल तक रिज़ल्ट का इंतज़ार करें.”

टूटी उम्मीदें और सवालों में घिरी सरकार

बिहार उर्दू-बांग्ला TET अब सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं रही, बल्कि यह 12 साल से चल रहे संघर्ष, टूटी उम्मीदों और सिस्टम की नाकामी की कहानी बन चुकी है.

अब सवाल सिर्फ़ रिज़ल्ट जारी करने का नहीं है, बल्कि युवाओं के विश्वास और सरकार की संवेदनशीलता का है. अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला सिर्फ़ भर्ती में देरी नहीं, बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरी चोट बन जाएगा.

अगर अब भी सरकार रिज़ल्ट जारी नहीं करती तो यह सिर्फ़ एक भर्ती प्रक्रिया की विफलता नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और प्रशासन की संवेदनहीनता का प्रतीक बन जाएगा.