28 अक्टूबर 2010 को जम्मू कश्मीर में समिति का रिलीज ऑफ़ पोलिटिकल(CRPP) आजादी: द ओनली वे कार्यक्रम का आयोजन किया था. जिसमें सभी राजनीतिक बंदियों को मुक्त करने की मांग की गई थी. इसके साथ ही कश्मीर को भी देश से अलग करने की बात की गई थी.
मशहूर लेखक अरुंधति रॉय ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. और कहा था कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं रहा है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय अधिकारियों ने UN में इस बात को स्वीकार किया है.
विजय कुमार सक्सेना ने दी मुक़दमे को मंजूरी
अरुंधति रॉय के खिलाफ मुक़दमा दिल्ली के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, नई दिल्ली अदालत के आदेश के बाद दर्ज किया गया था. इस मामले में दो अन्य आरोपी कश्मीर के अलगवादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और दिल्ली विश्वविद्यालय के सैयद अब्दुल रहमान गिलानी की मौत हो चुकी है.
13 साल के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल विजय कुमार सक्सेना ने भड़काऊ भाषण देने पर अरुंधति रॉय के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दे दी है.
प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन के खिलाफ मामला दर्ज
अरुंधति रॉय के साथ ही जम्मू कश्मीर के ही सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ कश्मीर के प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 153A (धर्म, नस्ल, स्थान या भाषा के आधार पर दो समुदाय में नफरत पैदा करना, शांति भंग करना) 153B(राष्ट्रीय अखंडता के विरुद्ध बातें करना) और 505 (भड़काऊ बयान देना) के तहत मामला दर्ज है.
अरुंधति रॉय के लिए कहा जाता है कि वह भारत विरोधी है. उसके साथ ही वो देश के खिलाफ नफरत फैलाने का काम करती हैं.
भारत में फैले कोरोना महामारी को लेकर अरुंधति रॉय ने कहा था कि मोदी सरकार मुसलमानों का नरसंहार करने के लिए इस वायरस का इस्तेमाल कर रही है.
‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ के लिए अरुंधती रॉय को 1997 में बुकर प्राइज मिला था.





