BPSC TRE-4 की देरी ने लाखों युवाओं को अधर में छोड़ा

BPSC TRE 4

BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग ) की चौथी शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 लगातार टलने से करीब 13 लाख अभ्यर्थियों के बीच गहरी नाराज़गी और अनिश्चितता का माहौल है. सरकारी कैलेंडर के अनुसार परीक्षा अब 22 से 27 सितंबर 2026 के बीच प्रस्तावित है, लेकिन पिछले एक साल से नोटिफिकेशन और आवेदन प्रक्रिया बार-बार टलने के कारण अभ्यर्थी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. सितंबर 2025 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने आश्वासन दिया था कि “चार-पांच दिनों में विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा.” उस समय तक अधिकांश जिलों से रिक्तियों का ब्योरा भी मंगाया जा चुका था. इसके बावजूद दिसंबर 2025 तक कोई विज्ञापन जारी नहीं हुआ. अभ्यर्थियों का आरोप है कि BPSC लगातार भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है. परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार ने 19 अप्रैल 2026 तक नोटिफिकेशन जारी होने की बात कही थी, लेकिन मई तक भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई.

इसी मुद्दे को लेकर पटना के गांधी मैदान में हजारों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने TRE-4 की बहाली निकालो” के नारे लगाए. छात्र नेता दिलीप कुमार ने आरोप लगाया,

“BPSC लंबे समय से छात्रों को गुमराह कर रहा है. बार-बार तारीखें दी जाती हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता.

क्या बोले अभ्यर्थी

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थियों ने भी हिस्सा लिया. कई छात्रों का कहना था कि लगातार अधूरे वादों ने आयोग पर से भरोसा खत्म कर दिया है. प्रदर्शन में शामिल सीमा नाम की एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम रोज़ लैपटॉप के सामने बैठकर पढ़ाई करते हैं, लेकिन यह भी साफ नहीं है कि परीक्षा कब होगी. घर वाले अब शादी का दबाव देने लगे हैं. नौकरी नहीं होने पर हमें बोझ की तरह देखा जाता है.

कई अन्य अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह की परेशानियां साझा कीं. कुछ छात्रों ने कोचिंग और तैयारी पर खर्च हुए पैसों को लेकर चिंता जताई, जबकि कई युवा वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अब तक आवेदन प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है. 8 मई 2026 को जब छात्र BPSC कार्यालय की ओर मार्च करने लगे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की. इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता दिलीप कुमार को हिरासत में ले लिया. इस झड़प में कई छात्र घायल हुए, जिनमें कुछ को इलाज के लिए अस्पताल भेजना पड़ा. इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहा. एक प्रदर्शनकारी छात्रा ने कहा,

पुलिस की लाठीचार्ज में घायल छात्र

“जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, हमारी तैयारी का कोई मतलब नहीं है.

छात्रों की मुख्य मांग है कि बिना किसी अतिरिक्त शर्त के जल्द से जल्द विज्ञापन जारी किया जाए और आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाए. लगातार टलती तारीखों ने अभ्यर्थियों की तैयारी की पूरी संरचना को प्रभावित किया है. कई छात्र पिछले एक साल से कोचिंग ले रहे हैं, लेकिन परीक्षा की अनिश्चितता के कारण उनकी मेहनत और पैसा दोनों दांव पर लगे हैं.

एक अभ्यर्थी ने बताया “मैंने अपनी सारी बचत कोचिंग में लगा दी.अब हर दिन यही डर रहता है कि अगर परीक्षा फिर टली तो हमारी मेहनत का क्या होगा?” इस अनिश्चितता का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है. कई अभ्यर्थी तनाव, अनिद्रा और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. सीमा कहती हैं, “मैं लगातार तनाव में रहती हूं.नींद नहीं आती.ऐसा लगता है जैसे हमारी जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा हो.”

आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. कई अभ्यर्थी बिना नौकरी के लंबे समय तक तैयारी करते-करते आर्थिक संकट में पहुंच चुके हैं. कुछ उम्मीदवारों को डर है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में और देरी हुई तो वे आयु सीमा पार कर जाएंगे और आवेदन का मौका हमेशा के लिए खो देंगे.

छात्रों का उत्साह लगातार कम हो रहा है

कोचिंग संस्थानों से जुड़े शिक्षकों का भी कहना है कि लगातार देरी से छात्रों की पढ़ाई की लय टूट रही है. एक शिक्षक ने बताया,“छात्रों का उत्साह लगातार कम हो रहा है.कई महिला अभ्यर्थियों पर पारिवारिक दबाव अधिक दिखाई दे रहा है.कई परिवार अब उन्हें नौकरी की तैयारी छोड़कर शादी करने की सलाह दे रहे हैं”.

छात्रों की मांग

BPSC और राज्य सरकार दोनों पर सवाल उठ रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया में इतनी लंबी देरी क्यों हुई और अब तक कोई स्पष्ट रोडमैप क्यों नहीं दिया गया. अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग और शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए. नियमित अपडेट, स्पष्ट समय-सारिणी और जवाबदेही की कमी ने छात्रों के भीतर अविश्वास पैदा किया है.

गांधी मैदान के पास प्रदर्शन करते छात्र

छात्रों का सुझाव है कि आयोग को समय-समय पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. साथ ही कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के सहयोग से संभावित परीक्षा पैटर्न, नमूना प्रश्नपत्र और दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि तैयारी कर रहे छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति कम हो.

जब तक TRE-4 भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तब तक लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि भविष्य से जुड़ा संकट बना रहेगा. सरकारी स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर निर्णय ही इस असमंजस का वास्तविक समाधान हो सकते हैं.