हलद्वानी हिंसा क्यों और कैसे हुई? आखिर … 6 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन? उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर भीड़ ने उग्र होकर चारों तरफ से पत्थरबाजी शुरू कर दी. इस पत्थरबाजी में अब तक 6 लोगों की मौत को गई है, 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं.

उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है. उत्तराखंड के हल्द्वानी में गुरुवार को भारी हिंसा हुई. हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर भीड़ ने उग्र होकर चारों तरफ से पत्थरबाजी शुरू कर दी. इस पत्थरबाजी में अबतक 6 लोगों की मौत को गई है, 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी और कई अधिकारी समेत 300 लोग घायल हो गए हैं. एसडीएम हल्द्वानी और कालाढूंगी भी इस हिंसक घटना में घायल बताए जा रहे हैं.

हल्द्वानी में धारा 144 लागू

गुरुवार को शाम 4:30 बजे हल्द्वानी के वनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस बल अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची थी. जहां 5:00 बजे अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी से कार्यवाही चल रही थी, इस अतिक्रमण का मौजूदा भीड़ ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. इस पथराव ने भयानक हिंसक घटना को अंजाम दे दिया. अतिक्रमण हटाने से शुरू हुई घटना आगजनी में तब्दील हो गई. शहर में जगह-जगह पर उपद्रवियों ने आगजनी कर कई वाहनों को फूंक डाला, उपद्रवियों ने वनभूलपूरा थाने को भी आग के हवाले कर दिया.

इस हिंसक घटना के बाद रात 2:00 बजे कोतवाली में डीआईजी ने प्रशासनिक बैठक की. बैथक में संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगाने की बात कही गई. इधर उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया है. पूरे हल्द्वानी में धारा 144 लागू कर दी गई है और वनभूलपूरा में भी कर्फ्यू लगाया गया है. इलाके में भारी पुलिस बल को लगाया गया है. हिंसा को हिंसा की आशंका को देखते हुए स्कूल और कॉलेज को बंद कर दिया गया है और इलाके में इन्टरनेट को भी रात से बंद कर दिया गया है.

50 हजार की मुस्लिम आबादी

यह पूरा मामला मुस्लिम बहुल इलाके का है, जहां मलिक का बगीचा मजार है. नगर निगम के अनुसार यह जमीन रेलवे की है जिसपर 50 हजार की मुस्लिम आबादी रहती है. पिछले साल से ही इस जमीन पर विवाद चल रहा है, यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इस साल 29 जनवरी को भी निगम इलाके से अतिक्रमण हटाने गई थी, दो एकड़ जमीन पर बने पक्के मकान को नगर निगम ने ढहा भी दिया था. पास में ही एक मदरसा और धार्मिक स्थल भी है जिसे उस समय नहीं तोड़ा गया था. 30 जनवरी को एक टीम ने पहुंच कर वहां तारबंदी कर दी और 1 फरवरी तक दोनों निर्माण को हटाने का नोटिस जारी कर दिया था. इसके विरोध में 3 फरवरी को लोगों ने नगर निगम कार्यालय के विरोध किया, लेकिन इस विरोध का कोई नतीजा नहीं निकाला. 4 फरवरी को फिर अतिक्रमण हटाने का फैसला किया गया. प्रशासन की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही 4 फरवरी को कई महिलाएं मलिक का बगीचा के पास दुआएं पढ़ने लगी. इसके बाद फिर 9 फरवरी को टीम अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची थी, जहां पर लोगों ने विरोध करते हुए प्रशासन पर हमला कर दिया.

खबरों के मुताबिक प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करने के लिए लोगों ने छोटे बच्चों, युवाओं और महिलाओं को भीड़ में आगे तैनात कर दिया था. पुलिस पर हमला करने के लिए पहले से ही उपद्रवी गली में तैनात थे. चार दिन पहले से चल रहे इस तनाव के बावजूद पुलिस कार्यवाही में पुख्ता इंतजाम नहीं होने की बात कहीं जा रही है.