बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की अप्रत्याशित जीत हुई है। इस जीत के बाद नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। जानिये इस चुनाव में सबसे कम मार्जिन वाली 10 सीट कौन सी रहीं।
192- संदेश विधानसभा, रिजल्ट के दिन किसी फ़िल्मी सस्पेंस से कम नहीं रहा। इस सीट पर जदयू के उम्मीदवार राधा चरण साह और राजद के उम्मीदवार दीपू सिंह मैदान में थे। दोनों के बीच कांटे की टक्कर चल रही थी। हर राउंड के बाद काफ़ी कम मार्जिन के कोई लीड ले रहा था। शायद ही कोई ऐसा दो राउंड रहा हो जहां एक ही पार्टी ने लीड ली हो। 28 राउंड चले इस चुनाव में आख़िरकार जीत होती है जदयू की। लेकिन जीत का मार्जिन महज़ 27 वोट।
ठीक ऐसा ही मार्जिन बिहार की कई सीट में देखने को मिला है। लेकिन आज हम बात करेंगे 10 ऐसी सीट की जहां सबसे कम मार्जिन से जीत दर्ज की गयी है।
हर एक वोट ज़रूरी होता है
203-रामगढ़ विधानसभा में सस्पेंस आखिरी वक्त तक बना रहा। वोट गिनती के दौरान अलग-अलग पार्टी के समर्थकों में झड़प भी हो गयी और कई पुलिस वालों को चोट भी आयी। यहां मुकाबला बहुजन समाजवादी पार्टी के सतीश कुमार सिंह यादव और भाजपा के अशोक कुमार सिंह के बीच रहा। आख़िरी राउंड आते-आते दोनों पार्टी के समर्थक फिर से भिड़ गए। अंत में बसपा के सतीश कुमार सिंह यादव की महज़ 30 वोट से जीत हुई।
195- अगिआंव विधानसभा में भाजपा और सीपीआई-माले के बीच रही। भाजपा की ओर से महेश पासवान और सीपीआई-माले की ओर से शिव प्रकाश रंजन उम्मीदवार थे। इन दोनों के बीच भी मुकाबला कुछ वोट से ही चल रहा था। आखिरी राउंड देर रात तक चलता रहा और 95 वोट से भाजपा के महेश पासवान की जीत हुई।
221-नबीनगर विधानसभा से आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद जदयू से चुनावी मैदान में थे। साल 2020 विधानसभा में चेतन आनंद राजद से चुनाव लड़े और जीते भी थे। लेकिन जब नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़ा, तो चेतन आनंद ने भी पाला बदल लिया। शायद इसलिए इस बार उन्हें जीत दर्ज करने में राजद से काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। राजद के उम्मीदवार अबोध कुमार सिंह ने चेतन आनंद को कड़ी टक्कर दी। आख़िरी राउंड में चेतन आनंद जीत गए लेकिन सिर्फ़ 112 वोट से।
21-ढाका विधानसभा ये कांटे की टक्कर राजद और भाजपा के बीच रही। राजद से फैसल रहमान और भाजपा से पवन कुमार जायसवाल के बीच किसी को भी बड़े मार्जिन से लीड नहीं मिल रही थी। देर रात तक चली काउंटिंग में राजद के फैसल रहमान ने 178 वोट से जीत दर्ज की।
48-फारबिसगंज विधानसभा में दो-पक्षीय मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच रहा। मनोज विश्वास (कांग्रेस) पहले काउंटिंग में लीड में रहे। लेकिन विद्यासागर केसरी (भाजपा) जल्द ही मनोज विश्वास से आगे निकल गए। हर राउंड में कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा आगे रही। आखिर में मनोज विश्वास ने 221 वोट से जीत दर्ज की।
65-बलरामपुर विधानसभा में मुकाबला तीन पार्टियों में चल रहा था। लोजपा-रामविलास, एआईएमआईएम और सीपीआई- माले के उम्मीदवार हर राउंड में कांटे की टक्कर बनाये हुए थे। बलरामपुर से सीपीआई-माले के पूर्व विधायक महबूब आलम फिर से चुनाव लड़ रहे थे। बलरामपुर महबूब आलम के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती थी। लेकिन इस बार एआईएमआईएम और लोजपा-रामविलास ने इसमें सेंध लगाई। पहले महबूब आलम 1318 वोट से तीसरे नंबर पर पिछड़े। फिर एआईएमआईएम के मोहम्मद आदिल हसन दूसरे नंबर पर रहे और संगीता देवी (लोजपा-रामविलास) ने जीत दर्ज की। लेकिन इस जीत का मार्जिन सिर्फ़ 389 वोट रहा।
7-चनपटिया में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा में रहा। इस सीट से कांग्रेस के अभिषेक रंजन 602 वोट से जीत दर्ज की। यहां से चुनाव लड़ रहे मनीष कश्यप 37,172 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मनीष कश्यप ने उमाकांत सिंह (भाजपा) के वोट को भी कम किया जिसका फायदा कांग्रेस को हुआ।
216-जहानाबाद और 229-बोधगया में राजद के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। लेकिन यहां भी जीत का मार्जिन 1000 वोट से भी कम रहा। राजद ने जहानाबाद में 793 वोट और बोधगया से 881 वोट से जीत दर्ज की।





