साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी- “PM आवास योजना के तहत साल 2022 तक सभी लोगों के पास अपना घर होगा।” लेकिन इस वादे की डेडलाइन ख़त्म हुए भी 3 साल हो चुके हैं।
सरकार कहती है – “हर गरीब के सिर पर छत होगी।” पर गरीब कहता है – “छत तो कागज़ पर है, असल में आसमान है।”
PM आवास योजना (ग्रामीण) और मुख्यमंत्री आवास योजना (राज्य स्तर) – दोनों का दावा है कि लाखों घर बने हैं। लेकिन Democratic Charkha की ज़मीनी रिपोर्ट बताती है – कई घर कागज़ों पर बने हैं जो ज़मीन पर अब भी अधूरे हैं, और कई तो ‘मौजूद’ ही नहीं। बिहार में आज भी जनता, ख़ास तौर से दलित-महादलित जनता, अपने घर के लिए तरस रही है।

आवास योजना: सपना ईंटों का, हकीकत भ्रष्टाचार की
2020 से अब तक बिहार में ₹25,000 करोड़ और उत्तर प्रदेश में ₹34,000 करोड़ खर्च दिखाए गए। पर जब रिपोर्टर गांवों में पहुंचे, तो पाया – कई घर बिना दीवार, कई बिना छत।
दरभंगा के केवटी प्रखंड में एक लाभार्थी ने बताया – “हमें ₹1.2 लाख मिला था, पर ₹20,000 पहले ही ‘कट’ हो गया।”
कहने को ‘पारदर्शी योजना’, पर हर फंड रिलीज़ में ‘ब्लॉक शुल्क’, ‘जांच शुल्क’ और ‘सहमति शुल्क’ तय है।
फाइलों में बने घर, ज़मीन पर खोखले वादे
सहरसा के एक गांव में 74 आवास ‘पूर्ण’ दिखाए गए। Democratic Charkha की टीम पहुंची – सिर्फ़ 29 खड़े मिले, बाकी ज़मीन पर ‘पत्थर का नींव और ईंटों का सपना’ पड़ा था।
जांच में खुलासा – कुछ ‘लाभार्थी’ वास्तव में स्थानीय नेताओं के रिश्तेदार निकले। फोटो फर्जी, भू-स्वीकृति फर्जी, और पैसा सीधा किसी दूसरे खाते में चला गया।
छत डालने के नाम पर कमीशन की छतरी
दरभंगा, मुज़फ्फरपुर और सिवान के ब्लॉकों में हर घर के फंड में औसतन ₹15,000 से ₹25,000 की अवैध कटौती। अर्थात् – ‘छत डालो, पहले हिस्सा दो।’
एक पंचायत सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर कहा – “अगर ऊपर हिस्सा न दो, तो रिपोर्ट ‘अपूर्ण’ डाल दी जाती है।”
सरकार कहती है – “कोई भ्रष्टाचार नहीं।” जनता कहती है – “हमारे घर की छत नहीं, नेताओं की दीवारें उठ रही हैं।”
PM आवास योजना: आंकड़ों का खेल और ज़मीन की सच्चाई
(आधिकारिक सरकारी आंकड़े, स्रोत सहित संकलित)
| मापदंड | आंकड़ा / स्थिति | स्रोत (आधिकारिक लिंक) |
| कुल लक्ष्य (Target) | 50,12,752 घर | PIB – PRID 2148468 |
| स्वीकृत घर (Sanctioned) | 49,02,291 घर | PIB – PRID 2155682 |
| पूरा हुए घर (Completed) | 38,39,417 घर (4 अगस्त 2025 तक) | PIB – PRID 2155682 |
| अधूरे घर (Incomplete) | 10,62,874 घर | गणना: 49,02,291 – 38,39,417 |
| मार्च 2023 तक स्वीकृत लक्ष्य | 38,64,565 घर | PIB – PRID 1911892 |
| मार्च 2023 तक पूरे हुए घर | 35,18,034 घर | PIB – PRID 1911892 |
| 2024–25 वित्तीय वर्ष में नया लक्ष्य | 7,90,648 घर (2.44 लाख + 5.46 लाख) | Times of India – Patna Edition |
| अब तक जारी राशि (अनुमान) | ₹1,200 करोड़ (पहली किश्त 2025) | Times of India – Patna Edition |
| 2024 तक पूर्णता दर (%) | लगभग 76 % | उपरोक्त गणना के आधार पर |
| फर्जी लाभार्थियों की शिकायतें | राज्यभर में ~2,800 मामले (CAG/रूरल डेवलपमेंट ऑडिट) | [CAG Report 2024 – PMAY-G Findings] |
मुख्य विश्लेषण:
- बिहार में कुल लगभग 10.6 लाख घर अधूरे हैं — यानी हर पांचवां घर अब भी निर्माणाधीन।
- 2023–25 के बीच निर्माण की गति धीमी पड़ी है; लक्ष्य की तुलना में 24 % घर लंबित हैं।
- फर्जी लाभार्थियों और भुगतान अनियमितताओं के मामले अब भी CAG रिपोर्ट में दर्ज हैं।
- राज्य सरकार ने हाल में ₹1,200 करोड़ की पहली किश्त जारी की है, पर पारदर्शिता रिपोर्टिंग अधूरी है।
योजनाओं में राजनीति, जनता के सपनों पर राजनीति
हर चुनाव से पहले नारा गूंजता है – “हर गरीब को पक्का घर!” और हर बार वही अधूरे ढांचे फिर से “नए काम” के तौर पर रिपोर्ट में भेजे जाते हैं। दरभंगा के एक ग्रामीण बोले – “हर सरकार हमारे घर की छत पर राजनीति करती है,
पर कभी छत पूरी नहीं करती।”
सरकारों की राजनीति में जनता अब भी बेघर
आवास योजना का मकसद था – “गरीब को सम्मान और छत देना।” पर आज यह बन चुकी है ‘कमीशन और कटौती की उद्योग योजना।’ जहां हर अधूरी छत एक पूरी कहानी कहती है – “वादा घर का था, मिला बस सपना।”
(स्रोत सूची) :
- Press Information Bureau (PIB) – PRID 1911892, 2113753, 2148468, 2155682
- Ministry of Rural Development (MoRD) Dashboard: https://pmayg.nic.in
- Times of India (Patna) – CM releases first installment under PMAY-G (2025)
- CAG Report 2024: PMAY-G Implementation Audit





