2 नवंबर को चट-पट और झट की सरकार ने पटना के गांधी मैदान में कार्यक्रम रख राज्य के 25 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटा था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने राज्य में अपने सरकार के कामों की हर तरफ से वाह-वाही लूटी थी.
नीतीश कुमार ने कहा है कि उनके मॉडल की चर्चा पूरे देश भर में हो रही है. लेकिन एक और चर्चा देश भर में नीतीश कुमार के मॉडल की होनी जरूरी है. बीते 10 सालों से उर्दू-बांग्ला टीईटी अभ्यर्थियों का रिजल्ट नीतीश सरकार नहीं दे पाई है.
एक दशक से उर्दू-बांग्ला टीईटी का रिजल्ट नहीं
अगस्त में परीक्षा लेकर सितंबर में रिजल्ट जारी करने वाली सरकार बीते एक दशक से उर्दू-बांग्ला टीईटी के रिजल्ट में सुस्त नजर आ रही है.
8 नवंबर को उर्दू-बांग्ला टीईटी अभ्यर्थियों ने सीपीआई के विधायक महबूब आलम के आवास का घेराव किया है. सुबह से ही राज्यभर के कई अभ्यर्थियों ने विधायक के घर को अपना धरना स्थल बनाया हुआ है. अभ्यर्थियों की मांग है कि उनके रिजल्ट मामले को विधायक विधानसभा में उठाएं. विधायक जी ने भी इसपर अपनी हामी भरी है.
2014 में उर्दू-बांग्ला टेट की परीक्षा हुई थी
उर्दू-बांग्ला टेट के अभ्यर्थियों ने बताया कि पिछले 10 सालों से वह लगातार अपने रिजल्ट को जारी करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन अभी तक उनकी मांगों को नहीं सुना गया है. कई बार उन्होंने पटना में आकर नेता मंत्रियों के पास अपनी पीड़ा को सुनाया है. अभ्यर्थी हसन राजा ने बताया है कि 2014 में उर्दू-बांग्ला टेट की परीक्षा हुई थी जिसमें करीब 12000 हजार अभ्यर्थी पास हुए थे. जिनका रिजल्ट अभी तक जारी नहीं किया गया है. प्रदर्शन करने के दौरान कई बार हम पर लाठी चार्ज भी हुआ है. हम सभी शाम तक महबूब आलम के आवास के बाहर उनका इंतज़ार करेंगे.





