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कृषि क़ानून के खिलाफ, महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेंगी

महिलाएं कृषि क़ानून के खिलाफ प्रदर्शन

सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि क़ानून के खिलाफ लगातार अन्नदाता करीब 2 महीने से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।दिल्ली के कड़ाके की ठंड में किसान संगठन हजारों की संख्या में दिल्ली से सटे बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं और उनका यह आंदोलन हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है।

कृषि क़ानून 

एक तरफ किसानों का कहना है कि जब तक सरकार तीनों कृषि क़ानून को वापस नहीं लेती उनका आंदोलन जारी रहेगा तो वहीं सरकार का कहना है कि वह संशोधन के लिए तैयार है लेकिन कानून को रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि इनसे किसान को ही फायदा मिलेगा।

18 जनवरी को मनाया जाएगा महिला दिवस

किसान आंदोलन की सुनवाई फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही है और इस मामले में फैसला आना बाकी है। बीते सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की ओर से महिलाओं पर की गई टिप्पणी से किसान महिलाएं नाराज हुई थी और उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी। अब खबर यह आ रही है कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 18 जनवरी को महिला दिवस मनाया जाएगा।

कृषि क़ानून 

खटकड़ टोल पर धरने की अध्यक्षता से लेकर मंच तक संभालने की जिम्मेदारी महिलाओं को दी जाएगी। इतना ही नहीं महिलाएं आज ट्रैक्टर चलाकर कृषि क़ानून के खिलाफ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेंगी और आंदोलन का हिस्सा बनेंगी।


  सफा खेड़ी ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कृषि क़ानून को रद्द करने की मांग की

कृषि क़ानून 

किसान एकता मंच महिला सेल की जिलाध्यक्ष सिक्किम सफा खेड़ी ने कहा कि 18 जनवरी को महिला दिवस के दिन महिलाएं घर का चुनाव छोड़ कर धरना स्थल पर पहुंचेंगे और उसका हिस्सा बनेंगी। इस दिन धरने पर भारी संख्या में महिलाओं का जमावड़ा होगा और केवल वही देखने को मिलेंगी। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में महिलाएं पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और इस आंदोलन की आत्मा हैं। देश की आजादी में भी महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई थी इसी के तर्ज पर किसान आंदोलन में भी महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए इस क़ानून को रद्द करने की मांग की।

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